
नीलांबर-पीतांबरपुर (लेस्लीगंज)। इस अवसर पर विद्यालय परिसर और पेंशनर भवन, दोनों जगह श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया।विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएँ तथा तिवारी जी के परिजन उपस्थित थे। समारोह की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण और दो मिनट के मौन रखकर की गई। परंपरा के अनुसार, इस वर्ष भी तिवारी जी के परिवार की ओर से कमजोर एवं मेधावी छात्राओं के लिए ₹11,000 की सहयोग राशि विद्यालय को दी गई।स्व. तिवारी जी के पुत्र सतीश तिवारी व अजीत तिवारी ने कहा कि पिता जीवनभर शिक्षा को समाज उत्थान का सर्वोच्च साधन मानते थे। उन्होंने सदैव बेटियों की शिक्षा पर बल दिया। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए यह वार्षिक सहयोग राशि प्रदान की जाती है।विद्यालय के प्राचार्य अमरेश सिंह ने कहा कि रमा वल्लभ तिवारी केवल एक प्रधानाचार्य नहीं, बल्कि विद्यालय की आत्मा थे। कठिन परिस्थितियों में विद्यालय की नींव रखकर उन्होंने अनुशासन और संस्कार की मजबूत परंपरा स्थापित की। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने उनके आदर्शों पर आधारित संस्मरण, भाषण और कविताओं के माध्यम से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।दूसरी ओर, पेंशनर समाज की प्रखंड इकाई ने भी पेंशनर भवन में उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष आनंद किशोर सिंह ने की, जबकि जिला अध्यक्ष जो. बलराम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने तिवारी जी के व्यक्तित्व को सादगी, ईमानदारी और अनुशासन का प्रतीक बताया।सेवानिवृत्ति के बाद भी तिवारी जी समाज सेवा और शिक्षा के उत्थान में सक्रिय रहे। एक वरिष्ठ पेंशनर ने कहा कि “उनका जीवन स्वयं में एक पाठशाला था। उनके योगदान को भूल पाना असंभव है।”सभा के अंत में सभी ने उनके आदर्शों पर चलते हुए शिक्षा और समाज सुधार के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान पूरे वातावरण में भावनात्मक गरिमा और प्रेरणा का माहौल बना रहा।

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