
पलामू जिले के तरहसी प्रखंड के सरकारी स्कूलों में हास्य-व्यंग्य भरा ड्रामा चल रहा है। शिक्षक-शिक्षिकाएं तो रजिस्टर पर मौजूद हैं, लेकिन क्लासरूम में निशान ही नहीं! मजबूरन नन्हे-मुन्ने छात्र ब्लैकबोर्ड पर चढ़कर साथियों को पढ़ा रहे हैं – मानो “बच्चों का टीचर बनाओ अभियान” चल रहा हो। यह
एक वायरल वीडियो में साफ दिखता है, की बच्चे क्लास में हंसते-खेलते नोट्स बना रहे। अब सवाल? मास्टर साहब कहां? शायद “अन्य महत्वपूर्ण कार्यों” में व्यस्त झारखंड राज्य के सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में तो शिक्षक भर्ती के लेटर बांटे जा रहे हैं, उपलब्धियां गिनाई जाती हैं। डिजिटल क्लास, टैबलेट, रियल-टाइम अटेंडेंस – सबका शोर! लेकिन जमीनी हकीकत? पलामू में 349 स्कूल एक ही टीचर के भरोसे, तरहसी जैसे इलाकों में एक कमरे में 5 5 सी क्लासें। बच्चे खुद पढ़ाते हैं । सिस्टम सोया पड़ा है – डैशबोर्ड पर हरी झंडी, ग्राउंड पर लाल सिग्नल! अब मजा आता है गरीब बच्चों के सपनों का। बच्चा सोचता है – आईएएस, आईपीएस, डीसी, एमबीबीएस बनूंगा! लेकिन जब टीचर ही न पढ़ाए, तो भविष्य कैसे चमकेगा? बड़े उद्योगपति, व्यापारी, अफसर अपने लाड़लों को प्राइवेट स्कूलों में धकेल देते – एसी क्लास, स्मार्ट बोर्ड। गरीब का बच्चा? सरकारी स्कूल में “सेल्फ-टीचिंग मोड” ऑन! शिक्षा की खाई चौड़ी हो रही, सिस्टम चुपचाप ताली बजा रहा। क्या ये बच्चे कभी UPSC क्रैक करेंगे, या जीवन भर “छोटे सर” ही बनकर रह जाएंगे?विभाग क्या कर रहा? मॉनिटरिंग कमेटी बनी, वीडियो कॉलिंग से चेकिंग – लेकिन फर्जी जॉइनिंग, अनुपस्थिति पर कार्रवाई कब होगा एक तरहसी में फूड पॉइजनिंग हो, बिजली का खतरा हो – सब चलता रहता। सरकार जागे, अफसर घूमें, वरना “बच्चा टीचर” ही नया ट्रेंड बन जाएगा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे, लेकिन सिस्टम की नींद गहरी

मास्टर साहब से पूछा – “सर, क्लास क्यों नहीं?” जवाब – “बच्चे खुद पढ़ा रहे हैं, मैं तो सुपरवाइजर हूं!” हा हा! गरीब बच्चे मजबूरी में सुपरस्टार बन रहे, लेकिन असली सुपरस्टार बनने के लिए सिस्टम को जागना होगा। पलामू के तरहसी से आवाज – “टीचर आओ, बच्चे पढ़ाओ!” वरना शिक्षा का मजाक यूं ही चलेगा
