नीलम दीदी के जन्मभूमि मनातू गढ़ में शिव को जगतगुरु मानने की आध्यात्मिक अवधारणा पर हुआ विराट आयोजन

यशवंत शर्मा (पलामू) नीलम दीदी जन्मभूमि मनातू में शिव शिष्य परिवार के तत्वावधान में भव्य शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन का उद्देश्य भगवान शिव को जगतगुरु के रूप में स्थापित करते हुए प्रत्येक मानव को शिव की शिष्यता से जोड़ने की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाना।शिव महोत्सव में बताया गया कि शिव के गुरु स्वरूप से जुड़ने के लिए किसी प्रकार की पारंपरिक दीक्षा,कर्मकांड या औपचारिकता की आवश्यकता नहीं है।

केवल यह भाव कि शिव मेरे गुरु हैं।यही शिव शिष्यता की शुरुआत है।और इसी भाव का स्थायी होना व्यक्ति को शिव का शिष्य बनाता है।महोत्सव में दीदी नीलम आनंद के जीवन और तपस्वी साधना का विशेष उल्लेख किया गया।घने जंगलों में पली-बढ़ी,संस्कारों में हिमालय की दृढ़ता और ममत्व में यमुना की गहराई लिए उन्होंने शिव शिष्यता की इस अवधारणा को संतान की भांति सीचा-सवारा। नीलम दीदी का उनका जन्म 27 जुलाई 1952 को नागपंचमी के दिन मनातू गांव में हुआ था।और 22 मई 1972 को साहब हरीन्द्रानंद के साथ उनका विवाह सम्पन्न हुआ।साहब हरीन्द्रानंद जी का जन्म 31 अक्टूबर 1948 को सिवान जिले के अमलोरी ग्राम में हुआ था।उन्होंने 1974 में भगवान शिव को अपना गुरु स्वीकार किया।और 1980 के दशक तक शिव शिष्यता की अवधारणा देश के विभिन्न भागों में व्यापक रूप से फैलने लगी।साहब का अनुभूत सत्य है कि गुरु शिव हैं।और सम्पूर्ण मानव सृष्टि शिष्य है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिव शिष्या बरखा आनंद ने कहा कि “भगवान शिव की शिष्यता ही मानव अभ्युदय का एकमात्र विकल्प है।शिव शिष्य अर्चित आनंद आप्त सचिव,साहब हरीन्द्रानंद ने इसे पूर्णतःआध्यात्मिक अवधारणा बताते हुए कहा कि शिव शिष्य अपने सभी आयोजन इसी उद्देश्य से करते हैं। कि हर व्यक्ति शिव को गुरु माने।शिव शिष्य डॉ.अमित ने मानव जीवन में गुरु की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु के बिना किया गया कोई भी धार्मिक कर्म आत्मिक परिणाम नहीं देता।वहीं शिव शिष्या अनुनीता आनंद ने शिव के आदि गुरु एवं जगत गुरु स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला।शिव शिष्य अभिनव आनंद ने शिव शिष्यता की पृष्ठभूमि को स्वानुभूतियों से उपजी दीर्घ आध्यात्मिक यात्रा बताया।इस महोत्सव में देश-विदेश से आए लगभग लाखों शिव शिष्यों की सहभागिता रही।कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत पलामू के रहने वाले आलोक कुमार ने किया। तथा आभार एवं समापन नीलम दीदी के भाई सचिंद्रजीत सिंह ने किया। आयोजन को सफल बनाने में पलामू जिले के समस्त गुरुभाई-बहनों का सराहनीय योगदान रहा।इस कार्यक्रम में भजन करने वाले बक्सर से सतीश कुमार, जपला से विजय कुमार, आरा से सुनील पांडे, रांची से संतोष पंडित रांची से मंजू, गढ़वा से यीशु गोस्वामी शहरसा से चंदन सहित गुरु भाई बहनों ने शिव शिष्य पर आधारित भजन को प्रस्तुत किया।

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