पलामू जिला के लेस्लीगंज थाना अंतर्गत लोटवा में मिर्जापुर निवासी ससुराल लेस्लीगंज लोटवां मे एक गरीब दंपति की बेबसी और गरीबी ने इंसानियत को झकझोर दिया।

गरीबी ने सताया तो इलाज के लिए पैसे की कमी के कारण परेशान दंपति ने मजबूरी में अपने मासूम दुधवा बच्चे को 50 हजार रुपये में बेच कर कराईं दवा , यह मामला सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।परिवार लंबे समय से ससुराल में रह कर बच्चे और सास के सेवा कर रहा था लेकिन कच्चा घर को गिरने से झोपड़ लगाना मजबूर कर दिया झोपड़ में रहने के बाद भी बरसात ने झोपड़ को गोद में लिया तो रहने में हो गया विवश तो देवी मंडप पड़ाव को ही अपना आवास मानकर वहीं गुजर-बसर कर रहा था। गरीबी, बीमारी और तंगहाली ने उनके जीवन को इतना झकझोर दिया कि उन्हें अपने ही कलेजे के टुकड़े को बेचने का खयाल आ गया। ओर उसने अपने कलेजे के टुकड़ों को बेच डाला 50 हजार में

आखिर जब उनकी व्यथा मीडिया तक पहुंची और खबर प्रकाशित हुई, तो माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत संज्ञान लिया।और संज्ञान में तुरंत x ट्विटर हैंडल पर मुख्यमंत्री ने पलामू उपायुक्त को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। आदेश मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और सहायता की व्यवस्था की गई। कुछ ही समय में दंपति को राहत प्रदान की गई और उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।लेकिन सवालों के घेरे में सरकारी तंत्र यह घटना केवल एक गरीब परिवार की मजबूरी की कहानी नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पोल खोलती है। आखिर क्यों किसी गरीब परिवार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा? जब तक मामला मीडिया में नहीं आया, तब तक प्रशासन और सरकारी योजनाएँ कहां सो रही थीं? सवाल का जवाब कौन देगा हलाके यही तक बात नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। की गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज के लिए योजनाओं का दावा किया जाता है, फिर भी एक गरीब परिवार इलाज के अभाव में अपने बच्चे को बेचने जैसा कदम केव उठाना पड़ा रहा है। यह केवल आर्थिक तंगी का नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी का भी प्रमाण है।इसी तरह आवास योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं?। वर्षों से देवी मंडप को छत मानकर जीवन जी रहे इस परिवार को अब तक आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला? क्या योजनाएँ केवल कागजों पर चल रही हैं और असल लाभार्थी उसके लिए तरसते रह जाते है क्या कारण ओर इसके लिए कौन है जिम्मेवार जनता का भरोसा कब होगा मजबूत? राज्य सरकार द्वारा जनता को हर बुनियादी सुविधा देने का आश्वासन लगातार दिया जाता है। लेकिन जब तक ऊपर से आदेश जारी नहीं होता है तब तक सरकारी तंत्र का पहिया घूमता ही नहीं। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या प्रशासन सिर्फ तब सक्रिय होगा जब खबरें मीडिया में हंगामा खड़ा करेंगी? कौन देगा जवाब यह मामला प्रशासनिक सतर्कता, नीति-निर्धारण और जमीनी हकीकत को लेकर कई गंभीर सवाल छोड़ता है। गरीब परिवार की बेबसी को राहत तो मिल गई, लेकिन यह घटना एक आईना है कि व्यवस्था में कितनी खामियां हैं और आम आदमी अब भी कितनी मजबूरियों से जूझ रहा है। यह स्पष्ट प्रमाण के रूप में मामला है आप अपना राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे


